पोती के जन्मदिन की शुभकामनाएं: पोती या नातिन के लिए दादा-दादी, नाना-नानी का कार्ड
तस्वीर चुनें, उसका नाम लिखें और लिंक भेज दें। फ़्री है, एक मिनट लगता है, और न आपको कोई अकाउंट बनाना है, न उसे। लिफ़ाफ़े के अंदर घर के बड़ों की तरफ़ से एक छोटा लेटर है, जो बताता है कि उसकी कितनी बातें किसी के ध्यान में रहती हैं।

पोती और नातिन के लिए जन्मदिन संदेश
इस पेज के हर कार्ड में यही मैसेज जाता है। सिर्फ़ नाम बदलता है, इसलिए न साइन-अप करना है, न हमें कुछ सेव करना पड़ता है।

प्यारी उनका नाम,
एक और जन्मदिन आ गया, और अब भी आदत नहीं पड़ी कि तुम्हारे जन्मदिन इतनी जल्दी-जल्दी कैसे लौट आते हैं।
इस रिश्ते की सबसे अच्छी बात यह है कि छोटी-छोटी बातों की फ़िक्र मेरे ज़िम्मे नहीं। बस देखना है, और देखा बहुत कुछ जाता है: जब किसी की नज़र न हो, तब भी तुम कितनी नरमी से पेश आती हो, तुम्हारी हँसी, और वो ज़िद जिससे तुम वो काम भी पूरे कर लेती हो जिन्हें बाकी लोग बीच में छोड़ दें।
आगे यह साल जैसा भी जाए, मैं तुम्हारी तरफ़ हूँ। इसे कमाना नहीं पड़ता। यह तो इस रिश्ते के साथ ही मिला था।
आज का दिन ख़ूब अच्छा बीते, बढ़िया वाला केक खाना, और फ़ुर्सत मिले तो फ़ोन करना। पूरा हाल सुनने का हमेशा मन रहता है।
ढेर सारा प्यार और आशीर्वाद। खुश रहो, जन्मदिन मुबारक हो।
पोती हो या नातिन
अंग्रेज़ी के एक शब्द के लिए हिंदी में दो हैं। बेटे की बेटी पोती है, जिसके लिए आप दादा या दादी हैं। बेटी की बेटी नातिन है, कई घरों में नवासी, जिसके लिए आप नाना या नानी हैं। लेटर में इनमें से कोई शब्द नहीं आता, इसलिए वो दोनों पर एक-सा बैठता है।
भेजने वाले का नाम भी लेटर में नहीं है। लिंक जिस मैसेज में डालें, वहाँ वही लिखें जो वो आपको बुलाती है: दादी माँ, नानू, दादू, नानी। परदादी-परदादा, या शादी से बने दादा-दादी, सब इसे भेज सकते हैं। रिश्ते का पेड़ कैसे भी बना हो, शब्द उस पर निर्भर नहीं।
जो लेटर उसके साथ बड़ा होता है
पोती चार साल की भी हो सकती है और चालीस की भी, और लेटर को दोनों पर चलना था। इसलिए इसमें पढ़ाई, गुड़िया या करियर वाली आम बातें नहीं हैं। यह वो कहता है जो दादा-दादी सच में देखते हैं: उसकी नरमी, उसकी हँसी, किसी काम में लगे रहने की उसकी ज़िद, और यह कि बड़ों का साथ किसी शर्त पर नहीं।
छोटी बच्ची इसे पढ़कर सुनाए जाने पर केक वाली लाइन पकड़ लेगी। टीनएज पोती पहले आँखें घुमाएगी, फिर बाद में चुपके से दोबारा पढ़ेगी। बड़ी पोती, जो शायद ख़ुद माँ बन चुकी हो, इसे वैसा ही पढ़ेगी जैसा यह है: पूरी उम्र प्यार करने वाले किसी अपने का लिखा हुआ।
भेजना कैसे है, क़दम-दर-क़दम
अगर लिंक भेजने की आदत नहीं है, तो घबराने की बात नहीं, यह सबसे आसान हिस्सा है। इस पेज पर एक तस्वीर चुनें, खाने में उसका नाम लिखें और लाल बटन दबाएँ। एक लिंक बनेगा और उसके साथ कॉपी करने का बटन आएगा।
फिर WhatsApp, SMS या ईमेल खोलें, पोती को मैसेज शुरू करें, या वो छोटी हो तो उसकी मम्मी या पापा को, और लिंक चिपका दें। बस इतना ही। जब वो टैप करेगी, उसकी स्क्रीन पर लिफ़ाफ़ा खुलेगा और कार्ड बाहर आएगा।
- चिपकाना नहीं आता? मैसेज वाले खाने में उंगली दबाकर रखें, फिर Paste पर टैप करें।
- चाहें तो बेटे, बेटी या किसी पोते से कहें कि आपकी तरफ़ से भेज दे। कार्ड कोई भी आगे भेजे, एक-सा दिखता है।
- सुबह जल्दी भेजें, ताकि उसके उठते ही कार्ड इंतज़ार कर रहा हो।
अपनी तरफ़ से दो बातें और
लेटर नहीं बदलता, पर जिस मैसेज में लिंक डालते हैं, उसमें जो चाहें लिख सकते हैं। पोतियों को छोटी-सी याद बहुत भाती है: वो दिन जब वो गोद में कहानी सुनते-सुनते सो गई, वो गाना जो बार-बार लगवाती थी, पहली बार जब उसने लूडो में हरा दिया। कोई तोहफ़ा या शगुन आ रहा है, तो वो भी वहीं लिख दें।
अगर वो दूसरे शहर या विदेश में है, तो लिख दें कि अगली बार कब मिलना है या कब फ़ोन होगा। तारीख़ वाला कार्ड पास लगता है।
तीन तस्वीरें
पहली असली फ़ोटो जैसी है: सुनहरी शाम में सूरजमुखी के खेत से हाथ में हाथ डाले गुज़रती दादी और चोटियों वाली छोटी बच्ची, आगे छोटे केक वाली पिकनिक। दूसरी, चमकीले 3D वाली, में मुस्कुराते दादा और पोती बगीचे में टी पार्टी कर रहे हैं, मेहमान टेडी बेयर हैं और बीच में गुलाबी केक। तीसरी, हल्के वॉटरकलर में, एक पीली फ़्रॉक वाली लड़की फूस की छत वाले कॉटेज के बाहर तितलियाँ उड़ा रही है, बगीचे की मेज़ पर केक है।
तस्वीरों में छोटी बच्चियाँ हैं, पर ये किसी भी उम्र की पोती पर वैसे ही जँचती हैं जैसे बड़े होकर अपनी बचपन की फ़ोटो। पोती बड़ी हो, तो सूरजमुखी वाली तस्वीर सबसे सौम्य रहती है।
लोग अक्सर पूछते हैं
पोती के जन्मदिन पर क्या लिखें?
वो बातें जो उसमें नज़र आती हैं, और यह भरोसा कि आपका साथ हमेशा है। फिर एक याद या मिलने का प्लान। पहला हिस्सा कार्ड का लेटर कह देता है, आपके अपने शब्द लिंक वाले मैसेज में जा सकते हैं।
दादा-दादी दोनों की तरफ़ से एक ही कार्ड भेज सकते हैं?
हाँ। लेटर एक की तरफ़ से भी ठीक है और दोनों की तरफ़ से भी, और भेजने वाले का नाम नहीं लेता। लिंक वाले मैसेज में दोनों नाम उसी तरह लिखें जैसे वो बुलाती है, जैसे "दादू और दादी माँ"।
बड़ी हो चुकी पोती के लिए भी ठीक है?
हाँ। लेटर उसकी उम्र के बारे में कुछ नहीं मानता। उसकी नरमी, उसकी हँसी और बड़ों के साथ की बात तीस पर भी उतनी ही सच है जितनी छह पर। तस्वीरों में छोटी बच्ची है, तो वो चुनें जिस पर उसे मुस्कान आए।
मुझे फ़ोन चलाना ज़्यादा नहीं आता। क्या भेजना मुश्किल है?
नहीं। नाम लिखना है, एक बटन दबाना है और लिंक कॉपी करना है। फिर उसे WhatsApp चैट, SMS या ईमेल में चिपका दें। कहीं अटकें, तो घर का कोई भी आपकी तरफ़ से भेज सकता है, कार्ड बिल्कुल वैसा ही दिखेगा।
क्या यह नातिन या परपोती के लिए भी है?
हाँ। नातिन, नवासी, परपोती या शादी से जुड़ी पोती, लेटर सब पर बैठता है। वो बस यह मानता है कि आप उसके दादा-दादी या नाना-नानी हैं, उस मायने में जो असल में मायने रखता है।
लेटर में लिखा हुआ बदल सकते हैं?
नहीं, हर पोती वाले कार्ड में लेटर एक ही है। आप तस्वीर चुनते हैं और नाम लिखते हैं, लिंक में बस इतना जाता है। इसी से कार्ड फ़्री है और उसके बारे में कुछ भी स्टोर नहीं होता।
क्या पोती को कुछ डाउनलोड करना पड़ेगा?
नहीं। कार्ड उसके फ़ोन, टैबलेट या कंप्यूटर के ब्राउज़र में खुलता है। पहले लिंक, फिर लिफ़ाफ़ा, फिर तस्वीर, और लेटर सामने।